शनिवार, 5 जुलाई 2008

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2008

परग्रही

क्या यह सोचना भयभीत करने वाला नहीं है कि इतने भंयकर रुप से विशाल
ब्रम्हाण्ड में हम अपने ग्रह पृथ्वी पर अकेले रहते हैं ?